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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 37
अमृता मानदा पूषा तुष्टिः पुष्टी रतिधृतिः । शशिनी चन्द्रिका कान्तिज्योत्स्ना श्रीः प्रीतिरङ्गदा ॥
स्वर से उत्पन्न कामदायिनी सोलह चन्द्र कलाएँ - १. अमृता, २. मानदा, ३. पूषा, ४. तुष्टि, ५. पुष्टि, ६. रति, ७. धृति, ८. शशिनी, ९. चन्द्रिका, १०. कान्ति, ११. ज्योत्स्ना, १२. श्रीः, १३. प्रीति, १४. अङ्गदा,
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