विना ब्रव्यादिवासेन न जपेन्न स्मरेत् प्रिये ।
ये स्मरन्ति नरा मूढास्तेषां दुःखं पदे पदे ॥
द्रव्यों की प्रतिष्ठा किए बिना न जप करे, न ध्यान। जो ऐसा न कर ध्यान करते हैं, उन मूर्खों को पग पग पर दुःख होता है।
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