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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 29
पर्युषितोच्छिष्टैर्दुर्गन्धैर्गन्धवर्जितैः । हेतुभिः परपात्रस्यैस्तर्पितं निष्फलं भवेत् ॥
तर्पण द्रव्य का विचार नष्ट, बासी, जूठे, दुर्गन्धित, गन्धहीन एवं दूसरे के पात्र में स्थित 'हेतु' (मद्य) से किया गया तर्पण निष्फल होता है।
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