चतुरस्त्र उड्डीयान पीठ है, वृत्त (वर्तुल) कामरूप पीठ है, चन्द्रार्थ जालन्धर पीठ है और त्रिकोण (त्र्यस्त्र) पूर्णगिरि पीठ है।
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