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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 24
अखण्डमण्डलाकारं विश्वं व्याप्य व्यवस्थितम् । त्रैलोक्यं मण्डितं येन मण्डलं तत् सदा शिवम् ॥
अखण्ड मण्डलाकार विश्व को व्याप्त कर जो स्थित है और त्रैलोक्य जिस 'मण्डल' से शोभायमान है, वह सदाशिवस्वरूप कहा गया है।
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