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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 22
पञ्चशुद्धिं विधायेत्थं पश्चाद् यजनमाचरेत् । सा पूजा सफला प्रोक्ता चान्यथा निष्फला भवेत् ॥
इस प्रकार 'पञ्चशुद्धि' कर पूजन प्रारम्भ करें। तभी पूजा सफल होती है, अन्यथा वह निष्फल होती है।
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