पीठ पर प्राणप्रतिष्ठा कर देवता के विग्रह का सकलीकरण (imagining Him) कर मूलमन्त्र से दीप्तात्मा एवं विद्वान् साधक न्यास द्रव्योदक से तीन बार उसका प्रोक्षण करे - यह 'देवशुद्धि' कही गई है।
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