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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 21
पीठे देवं प्रतिष्ठाप्य सकलीकृत्य मन्त्रवित् । मूलमन्त्रेण दीप्तात्मा न्यासद्रव्योदकेन च । त्रिवारं प्रोक्षयेद्विद्वान् देवशुद्धिरितीरिता ॥
पीठ पर प्राणप्रतिष्ठा कर देवता के विग्रह का सकलीकरण (imagining Him) कर मूलमन्त्र से दीप्तात्मा एवं विद्वान् साधक न्यास द्रव्योदक से तीन बार उसका प्रोक्षण करे - यह 'देवशुद्धि' कही गई है।
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