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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 17
सुस्नान भूतसंशुद्धिप्राणायामादिभिः प्रिये । षडङ्गाद्यखिलन्यासेरात्मशुद्धिः समीरिता ॥
हे प्रिये! शुद्ध स्नान, भूतशुद्धि, प्राणायाम और षडङ्गादि समस्त न्यासों से 'आत्मशुद्धि' होती है।
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