आत्मस्थानमनुद्रव्यदेवशुद्धिस्तु पञ्चमी ।
यावन्न कुरुते मन्त्री तावद्देवार्चनं कुतः ॥
१. आत्मशुद्धि, २. स्थानशुद्धि, ३. मन्त्रशुद्धि, ४. द्रव्यशुद्धि और ५. देवशुद्धि - ये पाँच शुद्धियाँ जब तक साधक नहीं करता, तब तक देवपूजा कहाँ सम्पन्न होती है।
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