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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 13
अमृताब्धौ मणिद्वीपे कल्पवृक्षतरोस्तले । रत्नप्राकारसन्दीप्तं स्मरेन्माणिक्यमण्डपम् ॥
या उत्तरमुख बैठकर अमृतसागर में स्थित मणिद्वीप में, कल्पवृक्ष के नीचे, रत्नप्राकार से देदीप्यमान माणिक्यमण्डप का ध्यान करे।
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