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कुलार्णव • अध्याय 6 • श्लोक 12
एकान्ते विजनेऽरण्ये देशे बाधाविवर्जिते । सुखासने समासीनः प्राङ्‌मुखो वाप्युदङ्मुखः ॥
कुलपूजा का स्थान और आसन एवं ध्यान - एकान्त स्थान में, किसी जनरहित वनप्रदेश में या पशु आदि की बाधारहित स्थान में,
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