इत्यादिलक्षणोपेतः कौलिको नियतव्रतः ।
यस्त्वां समर्चयेद्देवि भुक्तिमुक्त्योः स भाजनम् ॥
हे देवि! उक्त लक्षणों से युक्त, नियमों का पालन करने वाला जो कौलिक आपका अर्चन करता है, वह भुक्ति और मुक्ति का अधिकारी होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।