पशुभाव वाले व्यक्ति की शक्ति सोई हुई रहती है। कौल साधक की शक्ति जाग्रत् रहती है। उस शक्ति का जो सेवन करता है, वही शक्ति का सेवक है। जो पराशक्ति और अपनी आत्मा के संयोग से होने वाले आनन्द को अनुभव करता है, वही मैथुन का मर्मज्ञ है। अन्य लोग स्त्रीसेवी मात्र हैं।
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