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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 8
अवरोप्य पुनः शीतामवस्थां प्रापयेत्ततः । पादोनप्रस्थकैः पिष्ट्‌वा हस्ताभ्यां मेलयेत् सुधीः ॥
फिर इसे अग्नि से हटाकर ठण्डा करने के लिए छोड़ दे। फिर विद्वान् साधक एक प्रस्थ (अंजुलि) का चौथाई हाथों से मिलावे।
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