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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 77
कौलाः पशुव्रतस्याश्चेत् पक्षद्वयविडम्बकाः । केशसंख्या स्मृता यावत्तावत्तिष्ठन्ति रौरवे ॥
जो कौल साधक पशुव्रतों को मानते हैं, वे दोनों पक्षों की विडम्बना करते हैं और शरीर में जितने केश हैं, उतने काल तक रौरव नरक में रहते हैं।
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