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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 75
स्वेच्छ्या रममाणो यो दीक्षासंस्कारवर्जितः । न तस्य सद्गतिः क्वापि तपस्तीर्थव्रतादिभिः ॥
दीक्षा संस्कार से रहित जो स्वेच्छा से रमण करता है, उसकी कोई सद्गति तप, तीर्थ, व्रत आदि द्वारा नहीं होती।
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