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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 72
कौलज्ञाने ह्यसिद्धो यस्तद्दव्यं भोक्तुमिच्छति । स महापातकी ज्ञेयः सर्वधर्मबहिष्कृतः ॥
कौलज्ञान को हृदयङ्गम किये बिना जो द्रव्यों का भोग करना चाहता है, वह महापापी माना जाता है और सभी धर्मों से उसका बहिष्कार होता है।
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