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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 69
आवृत्तिं गुरुपंक्तिश्च वटुकादीत्र पूज्य यः । वीरोऽप्यत्र वृथापानी देवताशापमाप्नुयात् ॥
गुरुपंक्ति और बटुक आदि का पूजन किये बिना यदि वीर साधक भी वृथा पान करता है, तो वह देवता के शाप को प्राप्त करता है।
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