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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 68
श्रीगुरोः कुलशास्त्रेभ्यः सम्यग्विज्ञाय वासनाम् । पञ्चमुद्रा निषेवेत चान्यथा पतितो भवेद् ॥
श्रीगुरुदेव से कुलशास्त्रों की भावना को अच्छी तरह समझकर पञ्चमुद्राओं (मद्य, मांस, मत्स्य, मैथुन, और मुद्रा) का सेवन करना चाहिये, अन्यथा साधक का पतन होता है।
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