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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 67
यागकालं बिनान्यत्र दूषणं कथितं प्रिये ॥ यथा क्रतुषु विप्राणां सोमपानं विधीयते । मद्यपानं तथा कार्य समये भोगमोक्षदम् ॥
हे प्रिये! यागकाल के सिवा अन्य समयों में मद्यादि का सेवन करने से दोष होता है। जिस प्रकार यज्ञों में विप्रों के लिये सोमपान की विधि है, उसी प्रकार पूजा के समय इनका सेवन भोग और मोक्षप्रदायक है।
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