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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 63
देवान् पितृन् समभ्यर्च्य देवि शास्त्रोक्तवर्त्मना । गुरुं स्मरन् पिबन्मद्यं खादन् मांसंन दोषभाक् ॥
देवताओं और पितरों की पूजाकर गुरुदेव का स्मरण करते हुये शास्त्रोक्त विधि से मद्यपान और मांस भोजन करने से कोई दोष नहीं होता।
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