मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 62
ब्राह्मणस्य सदा पेयं क्षत्रियस्य रणागमे । गोलम्भने तु वैश्यस्य शूद्रस्यान्त्येष्टिकर्मणि ॥
ब्राह्मण के लिए यह अमृत सदा पेय है, क्षत्रिय के लिये युद्ध के आसन्न होने पर, वैश्य के लिये यज्ञ के अवसर पर और शूद्र के लिये श्रमसाध्य कार्य होने पर यह पेय है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें