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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 57
सुरा शक्तिः शिवो मांसं तद्भोक्ता भैरवः स्वयम् । तयोरैक्यसमुत्पन्न आनन्दो मोक्ष उच्यते ॥
'सुरा' शक्ति है और 'मांस' शिव। उन दोनों का भोक्ता साक्षात् भैरव है। उन दोनों के ऐक्य से उत्पन्न होने वाला आनन्द 'मोक्ष' कहलाता है।
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