सेविते च कुलद्रव्ये कुलतत्त्वार्थदर्शनः ।
जायते भैरवावेशः सर्वत्र समदर्शनः ॥
कुलद्रव्य का सेवन करने से कुलतत्त्व का अर्थ ज्ञात होता है और भैरवावेश का उद्रेक होकर साधक सर्वत्र समदर्शी होता है।
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