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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 45
महाषोडशदानानि कृत्वा यच्च फलं लभेत् । तत् फलं समवाप्नोति कृत्वा श्रीचक्रदर्शनम् ॥ सार्द्धत्रिकोटितीर्थेषु स्नात्वा यत् फलमाप्नुयात् । तत् फलं लभते देवि सकृत् कृत्वा क्रमार्चनम् ॥
महान् सोलह दानों से जो फल मिलता है, वही फल श्री चक्र का दर्शन करने से मिलता है। साढ़े तीन कोटि तीर्थों में स्नान करने से जो फल मिलता है, वह एक बार विधि विधान से कुलपूजा करने से मिलता है।
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