हे देवि ! आधार पात्र त्रिपद कहा गया है, अथवा चतुष्पद, षट्पद या वर्तुलाकार सुन्दर बनवाना चाहिए। विद्वान् साधक स्वर्ण, चाँदी, पत्थर, कूर्म, कपाल, लौकी, मिट्टी, नारिकल, शङ्ख, ताम्र, मुक्ता, सीप या पवित्र वृक्षों की लकड़ी के पात्र बनाये। पात्र बहुत बड़ा या बहुत छोटा अथवा टूटा फूटा न ले।
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