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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 38
अनधीतोऽप्यशास्त्रज्ञो गुरुभक्तो दृढव्रतः । कुलपूजारतो यस्तु स मे प्रियतमो भवेत् ॥
अनपढ़ और शास्त्र को न जानने वाला भी यदि गुरुभक्त और दृढव्रती होकर कुलपूजा में लगा रहता है, तो मुझे सबसे अधिक प्रिय होता है।
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