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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 35
मत्स्यमांसविहीनेन मद्येनापि न तर्पयेत् । न कुर्यान्मत्स्यमांसाभ्यां विना द्रव्येण पूजनम् ॥
मत्स्य और मांस से रहित केवल मद्य से तर्पण नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार मद्य से रहित केवल मत्स्य और मांस से पूजन नहीं करना चाहिए।
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