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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 32
हन्यान्मन्त्रेण चानेन त्वभिमत्र्य पशुं प्रिये । गन्धपुष्पाक्षतैः पूज्य चान्यथा नरकं व्रजेत् ॥
हे प्रिये! गन्ध, पुष्पाक्षत से पशु की पूजा कर निम्न मन्त्र से उसे अभिमन्त्रित कर उसकी बलि दे, अन्यथा साधक नरकगामी होता है।
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