हे प्रिये! मांस तीन प्रकार का कहा गया है - १. खेचर का, २. भूचर का और ३. जलचर का मांस। तर्पण के लिए इन्हीं में से एक की यथासम्भव कल्पना करे। मांस के देखने का वही फल होता है, जो सुरा दर्शन का बताया गया है।
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