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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 27
मांसन्तु त्रिविधं प्रोक्तं खभूजलचरं प्रिये । यथासम्भवमप्येकं तर्पणार्थं प्रकल्पयेत् । मांसदर्शनमात्रेण सुरादर्शनवत् फलम् ॥
हे प्रिये! मांस तीन प्रकार का कहा गया है - १. खेचर का, २. भूचर का और ३. जलचर का मांस। तर्पण के लिए इन्हीं में से एक की यथासम्भव कल्पना करे। मांस के देखने का वही फल होता है, जो सुरा दर्शन का बताया गया है।
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