मद्य, मांस और विजया अष्टगन्ध के साथ मर्दित कर साधक वटिका बना ले और मद्य के अभाव में इसी वटिका को जल में मिलाकर उससे तर्पण किया करे। (विमर्श - १. चन्दन, २. अगरु, ३. कर्पूर, ४. चीर, ५. कुङ्कुम, ६. रोचना, ७. जटामांसी ओर ८. कपि - ये अष्टगन्ध कहे गए हैं।)
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