सुरा को देखने मात्र से सब पापों से छुटकारा मिलता है। उसकी गन्ध को सूंघने मात्र से सौ यज्ञों का फल मिलता है। मद्य के स्पर्श मात्र से कोटि तीर्थों का पुण्य मिलता है। हे देवि! उसे पीने से चारों प्रकार की मुक्ति साक्षात् ही प्राप्त होती है।
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