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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 2
ईश्वर उवाच- शृणु देवि प्रवक्ष्यामि यन्मां त्वं परिपृच्छसि । तस्य श्रवणमात्रेण त्रिदशैः समतां व्रजेत् ॥
ईश्वर ने कहा - हे देवि! सुनिए, जो आपने पूछा है, उसे मैं कहूँगा। उसके सुनने मात्र से साधक देवताओं के समान होता है।
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