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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 16
पानसं द्राक्षमाधूकं खार्जूरं तालमैक्षवम् । मधूत्थं शीधु माध्वीकं मैरेयं नारिकेलजम् ॥ मद्यान्येकादशैतानि भुक्तिमुक्तिकराणि च ।
१. पानस, २. द्राक्ष, ३. माधूक, ४. खार्जूर, ५. ताल, ६. ऐक्षव, ७. मधु, ८. उच्छिष्ट, ९. माध्वीक, १०. मैरेय और ११. नारिकेल - ये ग्यारह मद्य भुक्ति व मुक्ति के देने वाले हैं।
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