मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 13
द्विगुणं मकरन्दस्य वारि संयोजयेद् घटे । द्वादशाहेन पाकः स्याच्छेषमन्यत् पुरोक्तवत् । एषा माध्वी समुद्दिष्टा देवताप्रीतिकारिणी ॥
माध्वी-शहद और इस शहद का दुगुना पानी एक घड़े में रख ले। बारह दिन में पूर्वोक्त क्रिया के सदृश इसका भी पाक हो जाता है। देवताओं को भी प्रिय लगने वाली इस मदिरा को 'माध्वी' कहा गया है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें