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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 11
नारिकेलप्रसूनं वा चैकप्रस्थं विनिक्षिपेत् । हरीतकी चाक्षफलं वसुनिष्कप्रमाणतः ॥ वह्नि त्रिकटुकञ्चापि निष्कमार्थं क्षिपेत् पृथक् । अशीतिगुडसम्मिश्रमेकस्मिन् योजयेद् घटे ॥
इसके बाद नारियल के फूल को एक प्रस्थ इसमें मिलावे। फिर हरें और अक्षफल (बहेड़ा) को आठ निष्क मात्रा में इसमें मिला दे। फिर वहिन ( = नीबू) और त्रिकटु (मरिच, पीपर, सोंठ) अलग (एक निष्क) से मिला दे। एक मिट्टी के घड़े में ८० गुड़ के साथ सभी को एक में मिला दे।
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