गौडी च श्वेतबर्बुरजम्बुत्वक्सधिताम्भसाम् ।
दशप्रस्थं कुलेशानि धातकीकुसुमं शुभम् ॥
हे कुलेशानि! फिर गौड़ी (नामक मद्य के लिए) श्वेत बर्बुर-जम्बु की छाल को पानी से धोकर और धातकी के फूल दोनों को दस अंजुलि लेना चाहिए।
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