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कुलार्णव • अध्याय 5 • श्लोक 1
श्रीदेव्युवाच- कुलेशाधारपात्राणां पिशितानाञ्च लक्षणम् । कुलद्रव्यस्य निर्माणं भेदं माहात्म्यमेव च ॥ अविधानेन यत् पापं सविधानेन यत् फलम् । तत् सर्वं श्रोतुमिच्छामि वद मे करुणानिधे ॥
श्री देवी ने कहा - हे कुलेश! आधारपात्रों और मांसों के लक्षण तथा कुलद्रव्य के निर्माण एवं उनके भेदों तथा माहात्म्य को कहिए। अविधि से किए गए कर्म का जो पाप होता है और सविधि से कृत कर्म का जो फल मिलता है, हे करुणानिधे! मैं वह सब सुनना चाहती हूँ कृपा कर उसे कहिए।
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