श्री देवी ने कहा - हे कुलेश! आधारपात्रों और मांसों के लक्षण तथा कुलद्रव्य के निर्माण एवं उनके भेदों तथा माहात्म्य को कहिए। अविधि से किए गए कर्म का जो पाप होता है और सविधि से कृत कर्म का जो फल मिलता है, हे करुणानिधे! मैं वह सब सुनना चाहती हूँ कृपा कर उसे कहिए।
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