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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 9
कुलमन्त्रमिदं देवि न्यासं शृणु वदामि ते । आदौ प्रातः समुत्थाय गुरुदेवानुचिन्तनम् ॥
हे देवि! यह कुलमन्त्र है। अब इसका न्यास आपसे कहता हूँ, सुनिए। पहले प्रातःकाल उठकर गुरुदेव का ध्यान करे।
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