प्रसन्नचित्त हो वशीभूत होने से, प्रसिद्ध अर्थ का निरूपण करने से, प्राक्तन पापों की शान्ति करने से, प्रपन्न (शरणागत) की आर्ति (दुःख) को नष्ट करने से और शीघ्र प्रसन्न करने से यह मन्त्र 'प्रासाद' कहा गया है ।
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