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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 50
दिव्यन्तरीक्ष भूशैलजलारण्यनिवासिनः ॥ प्रचण्ड भूतवेतालदेवर क्षोग्रहादयः । भयग्रस्तेन मनसा नेक्षन्ते तं कुलेश्वरि ॥
इस न्यास को जो करता है, उससे दिव्य लोक, अन्तरिक्ष, भूमि, पर्वत, जल और वन में रहने वाले प्रचण्ड भूत, वेताल, देव, राक्षस, ग्रह आदि भय-भीत रहते हैं तथा हे कुलेश्वरि! उसे देखने में भी डरते हैं।
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