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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 45
एवं न्यासे कृते देवि साक्षात् परशिवो भवेत् । मन्त्री नैवात्र सन्देहो निग्रहानुग्रहक्षमः ॥
हे देवि! इस प्रकार षोढान्यास जो करता है, हे पार्वति! वह साक्षात् परशिव के समान होता है। वह मन्त्रज्ञ साधक निग्रह और अनुग्रह करने में समर्थ होता है, इसमें सन्देह नहीं।
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