हे परमेश्वरि! फिर योनि, लिङ्ग, सुरभि, हेति, आदि चार मुद्राएं तथा वनमाला, महामुद्रा एवं नभो मुद्रा दिखाकर यथाशक्ति मूलमन्त्र का जप कर श्री पादुका मन्त्र का भी जप करे। हे देवि! इसके बाद शिवरूपी श्रीगुरु का मूर्धा में न्यास करना चाहिए।
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