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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 42
पुंरूपं वा स्मरेद्देवि स्त्रीरूपं वा विचिन्तयेत् ॥ अथवा निष्कलं ध्यायेत् सच्चिदानन्दलक्षणम् । सवतेजोमयं देवि सचराचरविग्रहम् ॥
हे देवि! अर्द्धनारीश्वर का ध्यान चाहे पुं रूप में करे या स्त्री रूप में अथवा सच्चिदानन्दरूप निष्कल स्वरूप का ध्यान करे, हे देवि! वह सर्वतेजोमय और चराचरात्मक विग्रह वाले हैं।
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