करोड़ों कामदेवों के समान सुन्दर और सदा सोलह वर्ष की अवस्था वाले अर्द्धनारीश्वर भगवान् का मुखकमल मन्द मुस्कान से युक्त है, तीन नेत्र हैं और चूड़ा चन्द्रमा से शोभायमान है। दिव्य वस्त्र, आभूषण, पुष्पमाला और चन्दन धारण किए हैं। चार हाथों में पानपात्र, चिन्मुद्रा, त्रिशूल और पुस्तक लिए है। विद्याओं और सिद्धियों से युक्त वे सदा आनन्दपूर्ण हैं। महाषोढा में उल्लिखित असंख्य देवता सदैव उनकी सेवा में लगे रहते हैं। ऐसे अर्द्धनारीश्वर भगवान् शिव का ध्यान अपने हृदयकमल में करे।
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