हे देवि! इस प्रकार से छः न्यास से समन्वित देह द्वारा साधक अनन्य मानस होकर भगवान् शिव एवं शक्ति का अर्धनारीश्वर के रूप में ध्यान करे ।
अर्धनारीश्वर ध्यान - अमृतसागर के मध्य में उभरा हुआ मणिद्वीप सुशोभित है। उसमें कल्पवृक्षों के वन के अन्तर्गत नवमाणिक्यों से बना मण्डप है। उस मण्डप में नवरत्नजटित सुन्दर सिंहासन पर कमल की त्रिकोणाकार कर्णिका में चन्द्रसूर्य से शोभायमान और आधे शरीर में अम्बिका से युक्त भगवान् शिव विराजमान हैं। दोनों के विशेष आभूषण उनके शरीरों में अलग-अलग शोभित है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।