त्रितार (ॐॐॐ), मूलमन्त्र और अन्त में स्वरों के साथ चतुर्थ्यन्त शक्तियों के सहित विष्णु आदि पद एवं नमः से युक्त मस्तक एवं मुख पर न्यास करे।
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