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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 32
भवः शर्वाऽथ रुद्रश्च पशुपतिश्चोत्र एव च । महादेवस्तथा भीम ईशस्तत्पुरुषाह्वयः ।। अघोरसद्योजातौ च वामदेव इतीरिताः ॥ गरिमादिफलप्रदा । करभद्रा खगबला घण्टाघरोग्रनयना चन्द्रधर्जी ततः परम् । छन्दोमयी जगत्स्थाना ज्वलत्तारा ततः परम् ॥ ज्ञानदा च टङ्कधरा धृतिर्द्वादश ईरिताः। कभादीनां ठडान्तानां वर्णानां देवतास्त्विमाः ॥
भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महादेव, भीम, ईश, तत्पुरुष, अघोर, सद्योजात और वामदेव - ये १२ शिव कहे गए हैं। करभद्रा, खगबला, गरिमादि, फलप्रदा, धर्मप्रशमनी, प‌ङ्क्तिनासा, चन्द्रार्धधारिणी, छन्दोमयी, जगत्स्थाना, ज्वलत्तारा, ज्ञानफलप्रदा, टङ्कधरा और धृति - ये १२ क भ से लेकर ठ ड पर्यन्त वर्णों के देवता हैं।
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