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कुलार्णव • अध्याय 4 • श्लोक 28
ई उं ऊं वितलं गुह्यतरं चानन्तसंज्ञकम् । शेषञ्च पूर्ववत् प्रोच्य गुल्फयोर्देवि विन्यसेत् ॥
इसके बाद मूलमन्त्र फिर ईं उं ऊं वितल और शेष पूर्ववत् रखकर हे देवि! गुल्फों में न्यास करे।
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