प्रपञ्चन्यास कहा गया है। अब मैं भुवनन्यास कहता हूँ। सर्वप्रथम 'ऐं ह्रीं श्रीं ह्सौः' इस मूलमन्त्र को लेकर अं आं ई लगाकर 'अतललोकनिलय शतकोटि गुह्याख्य योगिनीमूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नमः' कहकर हे प्रिये! दोनों पैरों में न्यास करे।
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